एक मुठी सरसो बनाम भोजपुरिया - केशव मोहन पाण्डेय
गदराइल गेहूँ के खेत में, भा मसुरी-मटर के अगरात फूलवन के बीचे बा ऊँखि के जामत पुआड़ी के पोंछ पकड़ले भा अकेलहूँ अपना हरिहर देहिं पर पीअर अँचरा ल...
गदराइल गेहूँ के खेत में, भा मसुरी-मटर के अगरात फूलवन के बीचे बा ऊँखि के जामत पुआड़ी के पोंछ पकड़ले भा अकेलहूँ अपना हरिहर देहिं पर पीअर अँचरा ल...
हमरी इयाद के मोटरी हमेशा लगवे रहेला। जब मन करेला खोल के बोल बतिया लेनी आ फेरु से गठिया के ध देनीं। घर के काम-काज की साथे साथे इहो चलल करेला।...
1. हमनी के रहब जानी दूनों परानी भोजपुरिया समाज आ संस्कृति के संरचना में खेती -किसानी के मुख्य भूमिका रहल बा । खेती -किसानी के असल आधार ह श्र...
मौसम के सिरमौर हऽ बसंत। अइसे सब मौसम के आपन महत्व आ विशेषता होला। बाकिर बसंत के एगो अलगे राग आ रंग होला। बसंत आवते मन रंगीन हो जाला। का बूढ़...
सभे के चाह मोती हीरा के होला। बाकिर मोती आ हीरा ना हाथे लागेला आसानी से। कबीर साहब कहले बाड़ें कि जिन खोजा तिन पाईया, गहरे पानी पैठ। मैं बपु...
अवतार के साँच ‘अवतार’ शब्द के प्राचीन प्रयोग यजुर्वेद में प्राप्त बा- “ उप ज्मन्नुप वेतसेऽवतर नदीष्वा। अग्ने पित्तमपामसि मण्डुकि ताभिरागहि स...
हमरा बचपन में दूइ गो ज्वाला प्रसाद जी के टीका वाला रामचरितमानस पढ़े के मिलल बा, जवना में लव-कुश कांड त रहबे कइल, छेपको कहानी बहुत पढ़े के मि...