रूपिया के गाछ - राम प्रकाश तिवारी
रामसेवक आ सीताराम एके ऑफिस में काम करत रहे लो। दूनू जाने लइकाईं के संघतिया रहे लोग आ सब तरे बराबर रहे लो। एक दिने सीताराम कहले “भाई रामसेवक,...
रामसेवक आ सीताराम एके ऑफिस में काम करत रहे लो। दूनू जाने लइकाईं के संघतिया रहे लोग आ सब तरे बराबर रहे लो। एक दिने सीताराम कहले “भाई रामसेवक,...
गनिया टमटम उडबले चल जात रहे। टमटम ढकर-ढकर करत रहे। ओकर पार्ट-पूजा बुझात रहे कि अलग-अलग हो जाई। सड़कि उभड़-खाभड़ रहे। टमटम पर बइठल डाक्टर मने...
नेता जी भर गर गेना का फूल के माला पहिनले, दुनू हाथ जोरले, मन्द- मन्द मुसुकात आगे- आगे चलत रहनीं। पीछे से कानफारू सुर में नारा लागत रहे। हमार...
इ सन् 1960 के बात ह। तब हम बनारस पढत रहलीं। वो दिन हम अपने कमरा मे पढले मे तल्लीन रहलीं कि तबले हमके बुझाइल कि केहू हमरे लगे आके ठाढ हो गइल ...
जानू दा।पूरा नाम जमालुद्दीन खान।मिलकी पर के जमिंदार।सांझी खा दलान पर जब बैठकी में बइठस त गाँव के हिन्दू मुसलमान सभे जुटत रहे।जुटे काहे ना वे...
कमली कई बरिस बाद आज ससुरा से अपना गाँवे आइल बिया। ओकरा खुशी के ठेकाना नइखे। आवते गाँव-घर घूमे निकल परलि। छोट-बड़ सभकर हाल-चाल पूछत कई घंटा बा...
देवाली आवते सन ८८ ई.के घटना मन परेला। बी.एस.सी के दुसरका साल रहे ठीक दिवाली का एक दिन पहिले सत्या भाई नित्या भाई बबलू आ ढुनमुन का संगे हमह...
जीवन के बडकी भउजाइ जवन बिआह का दूसरके साल मुसमात हो गइल रही बहुत दिन से उनका के बोलावत रही। जीवनो बहुत दिन से सोचत रहस भउजाइ से भेंट करेला...
अदरा का चढ़ला पांच दिन भइलो का बाद आकाश में बादल के कवनो नामो निशान ना रहे। खेतिहर लोग आसमान का ओरी टकटकी लगा देखत रहे। "लागऽता इनर भ...
संदेस परीक्षा खत्म भइला का बाद अपना चाचा का लगे गइलें। गांव के रहल लइका खेत-बधार टोला-परोसा में घूमे के आदत चाचा का काम में जाते बेचारू घर...