संपादकीय

लेखक औरी कवि लोगन से

केवनो समाज के बिकास में ओकरा लेखकन औरी कवि लोगन जइसन कलाकारन के बहुत बड़ जोगदान होला औरी भोजपुरी लोकसाहित्य के बिकास में उनकर योगदान केहू से छिपल नइखे। हम मैना की ओर से आप लोगन से गुहार करत बानी कि आप सभे आपन रचना भेजीं ताकि ऊ सबका सोझा रखल जा सके। आप आपन कबिताम काथा, खेला (नाटक), लेख, गीत, केवनो छपल रचना पर आपन राय भा चाहें औरी साहित्य के केवनो बिधा होखे भेजीं। ई हमनी के अहोभाग रही कि ओके छाप सकीं जा।

कबिता, काथा, लेख औरी खेला (नाटक) खाती

आप आपन कबिता, काथा, लेख औरी खेला (नाटक) मंगल आ फेर केवनो फोण्ट में लिख के माइकोसाफ्ट के वर्ड में हमनी के आपन परिचय, एगो तसबीर के संगे ईमेल में भेजीं। ईमेल भेजे के बेरा बिसय बसतू में जेवनार (बिधा) जइसे कि कबिता, काथा, लेख आ खेला जरुर लिखीं। रचना भेजे के बेरा ए बातन के खियाल राखे के किरिपा करीं
आपन नाम
आपन छोट परिचय
आपन एगो तसबीर
संपर्क सूत्र (पता औरी फोन नं)
रचना के नाँव
जेवनार (बिधा) के नाँव (कबिता, काथा, लेख आ खेला)
सगरी जानकारी संगे रउआँ हे ईमेल पर भेजीं

केवनो रचना पर राय भा टिप्पणी

आप केवनो कबिता, काथा, लेख औरी खेला (नाटक) पर राय भा टिप्पणी मंगल आ फेर केवनो हिन्दी के फोण्ट में लिख के माइकोसाफ्ट के वर्ड में हमनी के आपन परिचय, एगो तसबीर के संगे ईमेल में भेजीं। भेजे के बेरा ए बातन के खियाल राखे के किरिपा करीं
आपन नाम
आपन छोट परिचय
आपन एगो तसबीर
संपर्क सूत्र (पता औरी फोन नं)
रचना के नाँव औरी लिंक
सगरी जानकारी संगे रउआँ हे ईमेल पर भेजीं

सामान्य सूचना 


  1. रऊआँ आपन रचना दिहल ई मेल पर भेजीं। 
  2. राउर रचना कहीं प्रकासित ना भईल होखे। 
  3. रचना के प्रकासन के अधिकार रऊआँ लगे होखे के चाहीं। 
  4. रऊआँ रचना भेजला के दू से तीन हप्ता के समय दीं ताकि राऊर रचना पढल जा सके औरी प्रकासन खाती निरनय लिहल जा सके। राऊर जेवन रचना पसन परी ऊ रचना कब छपी एकर सूचना ई-मेल से जरूर भजल जाई।
  5. ई पत्रिका केवनो लाभ खाती नईखे चलत एसे जबले केवनो मजूरी के बात संपादक मण्डल नईखे करत, तब ले केवनो मजूरी दिहल सम्भव नईखे। 
  6. रऊआँ जब कबो आपन केवनो रचना जेवन ए पत्रिका में छप होखे कही औरी प्रकासित करत बानी तऽ उम्मीद बा कि आप पत्रिका के नाँव जरूर देब। 
  7. जदि केहू के केवनो रचना भा तसबीर से आपत्ति होखे तऽ कारन के संगे ई-मेल करो। एक हप्ता के भीतर रचना भा तसबीर हटा दिहल जाई।
विनीत
संपादक

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