संपादकीय

मैना: भोजपुरी साहित्य क उड़ान क बारे में

मैना एगो चिरई ह जेवन मनई के बोली के नकल उतार सके ले औरी उतारबो करेले। कबो-कबो तऽ ई नकल एतना साफ होला कि लगबे ना करेला कि मनई नाही एगो चिरई बोलत बीआ। सङही भोजपुरी लोकसाहित्य औरी लोकजीवन में मैना चिरई के बहुत बड़ जगह बा। लरिकाई में इया के तोता-मैना के काथा होखे चाहें जिनिगी के केवनो बड़हन बात भा सीख होखे, मैना चिरई हमेशा एगो चिन्ह औरी उदाहरन बन के सोझा आजाले औरी कहेले कि देखऽ रसता ई नाही, ई हऽ। औरी ए तरे हर भोजपुरिया के मन के एगो कोन में चुपचाप बइठ के आपन काम क रहल बे।
भोजपुरी लोक परम्परा, जीवन औरी साहित्य जाने केतना पुरान बा कुछऊ कहल मुसकिल बा औरी सङही ओकर फईलाव अथाह बा जेमे जाने का-का समाईल बा। सगरी भोजपुरी लोक परम्परा, जीवन औरी साहित्य कबिता, काथा, गीत, खेला औरी नाच जइसन कईगो जेवनार (बिधा) सोझा आइल बा औरी भोजपुरिया समाह ओके अपनवले बा। मगर बाचिक भईला से बहुत कुछ समय के धार में बहि गईल बा औरी बहुत कुछ बह रहल बा। हर सुख के, हर दुख के लोक परम्परा रहलि हऽ जेवन बदलाव के बरखा में बुताईल जाता। बस खाली बुताते नईखे, संगे-संगे सगरी चिन्ह औरी निशानो मिटल जाता जेवना के जानल, समझल औरी सहेजल जरूरी बा। 
मैना भोजपुरी साहित्य खाती एगो छोट डेग बा जेवना के बस एगही धेय बा औरी उ ई बा कि भोजपुरी साहित्य जेवन भोजपुरिया समाज के लोक, परम्परा, बिसवास, मरजादा, संस्कार औरी काल्ह औरी आज के समेटले होखे ऊ साहित्य अधिका से अधिका लोगन तक पहुँचे चाहें ऊ केवनो जेवनार में होखे। 
ए ई पत्रिका के शुरुआत 11 मई 2014 के श्री प्रभुनाथ उपाध्याय जी के निर्देशन औरी संपादन में  एगो मासिक ई पत्रिका के रूप में भईल औरी ई पत्रिका 11 जनवरी 2015 ले एगो मासिक ई पत्रिका के रुप में प्रकासित होत रहल। ई पत्रिका हर महीना के 11 तारीख के पत्रिका प्रकासित होखत रहल औरी 11 जनवरी 2015 ले नौ गो मासिक अंक निकलल। लेकिन समय बितला के संगे ई बुझाए लागल कि पत्रिका के मासिक भईला से पाठकन से पत्रिका जुड़ नईखे हो पावत औरी जेवन धेय ले के चल रहे ऊ पुरा नईखे हो पावत, एसे ई पत्रिका 13 जनवरी 2015 कऽ दसवाँ अंक से एगो साप्ताहिक ई पत्रिका में बदल गईल जेवन हर मंगर के प्रकासित होले।  
प्रभुनाथ उपाध्याय
संपादक
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(पत्रिका में प्रकाशित विचार लेखक लोगन के हऽ औरी आवश्यक नइखे संपादक मंडल हर से बात से सहमत होखे)

सम्पादक मण्डल

संपादक: प्रभुनाथ उपाध्याय
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(सगरी पद, संचालन औरी संपादन अवैतनिक औरी अव्यवसायिक)

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