संपादकीय

नेवता-हकारी - प्रकाश उदय

आजु तिलक में छौड़ा के, कल छौड़ी के बरियात में
दिनभर मँड़वाने-भतवाने जबरन जगरम रात में

नेवता पर नेवता पर नेवता एक लगन में चरि चरि गो
एने लूक लहरिया मारे रोके पत पीपर-बर हो
ए चाचा तू ओहिजा होल, ए बाचा तू होहिजा में
दिनभर मँड़वाने-भतवाने....

ओइजा नेवता नगद चलेला, होइजा धोती आ साड़ी
हो हितई त चहुँपावे के बाटे दही भरल हाँड़ी
छूटे मत हिल हिंड़ा न जाये भुला न जाए बात में
दिनभर मँड़वाने-भतवाने....

पाँच बजियवा बस के सट्टा, सात बजियवा बिगड़ल बा
आठ बजियवा दस पर पहुँचल, चवा-चूल ले ठकचल बा
जिपिया माँगे एबरी-दोबरी दे द जिउआ जाँत के
हब उहँवा नस्ता सँपरा के, हुँहवा पहुँचब पाँत में

लागल खोंच नया कुर्ता में, फाटल गंजी झाँकत बा
कवन सफाई लंगड़इला के, माँगल पनही काटत बा
ई सुख का जाने जे सरवा, खेलत बा अफरात में
दिनभर मँड़वाने-भतवाने....
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लेखक परिचय:-

नाम: प्रकाश उदय
जन्म : 20 अगस्त 1964, बनारस (उत्तर प्रदेश)
भाषा : हिंदी, भोजपुरीविधाएँ : कविता, आलोचना
संपर्क:- श्री बलदेव पी.जी. कॉलेज, बड़ागाँव,
वाराणसी-221204 (उत्तर प्रदेश)
फोन: 094152 90286
ई-मेल udayprakash1964@gmail.com
अंक - 113 (03 जनवरी 2017)






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