संपादकीय

नवका साल - जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

सबही बतावत नीमन हाल
अबहीं मनाईं नवका साल॥

पिछिली बात भइल पुरानी
गलती सही सभ नादानी
बिन चारा के पड़ल जाल ॥ अबहीं मनाईं.........

बड़ बडुवन के अइंठल छूटल
धनवानन के क़िसमत फूटल
जनता बाटे भइल बेहाल॥ अबहीं मनाईं.........

नेह छोह से पलवित उपवन
सभसे मिलल करे सभके मन
सभके गलs सभही पर दाल॥ अबहीं मनाईं ....

बिंहसे भुइयाँ नवके सपनवाँ
हसत जिनगी घरवा अंगनवाँ
असों होइहें मनई निहाल ॥ अबहीं मनाईं.........
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लेखक परिचय:-

नाम: जयशंकर प्रसाद द्विवेदी
बेवसाय: इंजीनियरिंग स्नातक कम्पुटर व्यापार मे सेवा
संपर्क सूत्र:
सी-39 ,सेक्टर – 3
चिरंजीव विहार, गाजियावाद (उ. प्र.)
फोन : 9999614657

अंक - 113 (03 जनवरी 2017)

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