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पंचर के दुकान - प्रकाश उदय

हैंडिल पैडिल टायर चक्का
दुकान हटे पंचर के पक्का

ना कवनो पोस्टर ना कवनो पलानी
काठे के बाक्सा बा नादे में पानी
लागे के दुई-चार टक्का
दुकान हटे पंचर के पक्का

ओ से भरइब चवन्नी लगइब
अपने से भरब त उहो बचइब
पंप बदे भइल धरमधक्का
दुकान हटे पंचर के पक्का

डकटर वकील अफसर हीरो भा नेता
लाखन करोड़न में लेता आ देता
सुनियो के खाय ना सनक्का
दुकान हटे पंचर के पक्का

दुइ चेला एक भैने एगो भतीजा
तनी-तनी गलती प नौ-नौ नतीजा
बुढ़वा लगी मम्मा कक्का
दुकान हटे पंचर के पक्का

देसवा बंटा देले नेतवा अभागा
एके में बान्हे इ धंधा के धागा
दिल्ली लाहौर चाहे ढक्का
दुकान हटे पंचर के पक्का
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लेखक परिचय:-

नाम: प्रकाश उदय
जन्म : 20 अगस्त 1964, बनारस (उत्तर प्रदेश)
भाषा : हिंदी, भोजपुरीविधाएँ : कविता, आलोचना
संपर्क:- श्री बलदेव पी.जी. कॉलेज, बड़ागाँव,
वाराणसी-221204 (उत्तर प्रदेश)
फोन: 094152 90286
ई-मेल udayprakash1964@gmail.com
अंक - 111 (20 दिसम्बर 2016)

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