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कुक्कुर के कहानी - 3 - धरीक्षण मिश्र

अध्याय - 3

दिल्ली में और लखनऊ में हमरो एकहे गो घर बाटे।
ऊ छोट मोट ना बा कवनों दूनूँ घरवा लमहर बाटे॥1॥

ओही घर में राखल हमार सब हक पद के गट्ठर बाटे।
दोसर केहु जा के ओहि में से कुछ ले मति ले ई दर बाटे॥2॥

कुक्कुर हमार दुओ जगही एकहे गो पहरा पर बाटे।
बड़का बा सीधा बहुत किंतु छोटका जब जब धावे काटे॥3॥

लखनौआ घर का पहरा पर कुक्कुर हमार जे बइठल बा।
ओकर बोली सुनि के हदास बहुतन का मन में पइठल बा॥4॥

औरी उहवाँ केतने लोगन के गठरी धइल सहेजल बा।
सबका आपन आपन कुक्कुर पहरा देबे के भेजल बा॥5॥

जाने भर में बोलतू कुक्कुर सब खोजि खोजि पहुँचावेला।
लोग जब पानी उहवाँ के तब कंठ उघरि ना पावेला॥6॥

केतने कुक्कुर अइसन बाड़े पहरा खातिर भेजल जाले।
उहवाँ नीमन कवरा पा के ऊ खा के सब दिन औंघाले॥7॥

कवरा प्रतिदिन बीसन रुपया ढुढ़हाई अलग मुनाफा में।
रेलो पर बिना टिकट घूमें पकड़ायँ न कवनों दाफा में॥8॥

कवनों देशी बुलडाग हवे कवनों ताजी पनियाला ह।
कवनों असली अलसेशियन ह त कवनों भुटिया काला ह॥9॥

कवनों घोघर कवनों लकड़ा कवनों कुछ अधिक शिकारी बा।
कवनों के मुँह सुइलार हवे कवनों कोकाच के भारी बा॥10॥


कवनों डलमेशियन बा जे के चितकाबर रंग सुघर बाटे।
कवनों का खउरा धइले बा खजुवावत खबर खबर बाटे॥11॥

दूनूँ कानन तर आठ पहर अँठई के दल बा अटल रहत।
आगे पाछे कुकुरौंछी के दल रातो दिन बा सटल रहत॥12॥

कवनों कुक्कुर बाटे कटाह कवनों ओहि में तनि ढूँढ हवे।
कवनों ओहि में तनि झबरा बा कवनों पोंछी के भूँड़ हवे॥13॥

कवनों बतास सुनि भोंकेला कवनों रहि रहि के ठोठियाला।
कवनों अइसन चुप्पा बाटे कानों धइले ना कोंकियाला॥14॥

कुछ गोला मुँह बरनार्ड हवें ब्लड हाउण्ड बड़का कान हवे।
न्यु फाउण्ड लैण्ड जाति वाला बिलकुल बरनार्ड समान हवें॥15॥

मल्टीज यार्क शायर टेरियर बुल टेरियर और फाक्स टेरियर।
ई चारू टेरियर देखे में लउकेले प्राय: एक नियर॥16॥

गे हाउण्ड और बोर जोई प्वाइण्टर कोली एक भाँति।
लम्बा गरदन आ लम्बा मुँह दउरे वाला पतराह काँति॥17॥

बुलडाग चार्ल्य इसपेनियल पग मस्टिफ जे चार प्रकार हवे।
झूलत बा ओठ नाक चापुट कद छोटा, बड़ा कपार हवे॥18॥


रशियन जे हवे उल्फ हाउण्ड ऊहे ह जाति बोर जोई।
आ चार्ल्स नाम का पहिले किंग रखला से नाम शुद्ध होई॥19॥

बासठ क्ल्म्बर इस्पेनियल आ पोमेरेनियन जाति गनावल बा।
ई तीनि जातिका कुक्कुरके मुँह खेंखर नियर बनावल बा॥20॥

कुछ जनसंघी कुछ मन संघी कुछ साथी सिर्फ कहावेले।
कुछ दल का दल-2 में भासें कुछ एने ओने धावेले॥21॥

कवनों बड़हन बकबादी बा कवनों ढँगगर बातूनी बा।
कवनों निछान बादी बाटे कवनों एकदम से खूनी बा॥22॥

कुछ के बा बनल विरोधी दल कुछ के बाटे सरकार बनल।
हमनीं के भुलियावे खातिर नित रहे उहाँ तकरार ठनल॥23॥

अपना आँखि कान नइखे आ की बुद्धिये जरावल बा।
कि बीचे बोले खातिर एक विरोधी दल बैठावल बा॥24॥

आपन दल मुँह देखल कही ओपर अइसन अनुशासन बा।
दोसर दल केतनों साँच कही ओपर तनिको विश्वास न बा॥25॥

हमनीं के दुक्ख सुने खातिर खुलहा ना कवनों फाटक बा।
अइसन बढ़ियाँ देखे लायक ई प्रतातंत्र के नाटक बा॥26॥
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धरीक्षण मिश्र























 









अंक - 104 (01 नवम्बर 2016)


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