संपादकीय

गोकुल जइसन गाँव - विनीता ‘रंजन’

वृन्दावन जइसन बारी बा, गोकुल जइसन गाँव
खेलेलें लइका कान्हा जइसन झूलि कदम्ब के छाँव॥

माई जसोदा जइसन लागे हर घर के महतारी
सभकर कान्हा मारेलें नित अँगना किलकारी।
झूमि-झूमि के चिरई गावे छेड़े मन के भाव
खेलेलें लइका कान्हा जइसन झूलि कदम्ब के छाँव॥

बाबूजी नन्द बाबा जइसन कहनी रोज सुनावस
रोवस जदि लइका उनके घोड़ा बन के खेलावस।
बाला गोपियन के माथे पर बिंदिया बड़ा सोहाव
खेलेलें लइका कान्हा जइसन झूलि कदम्ब के छाँव॥

नवकी दुलहिन अँगना में जब मटक-मटक के चलस
लचके कमरिया पियरी घुँघटा तान के जब ऊ चलस।
पायल बाजे अइसे जइसे बाजे ला सितार
खेलेलें लइका कान्हा जइसन झूलि कदम्ब के छाँव॥
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लेखक परिचय:-

नाम: विनीता ‘रंजन’
जनम दिन: 16 अगस्त 1965
गाँव - एकवारी (मठिया), पो-बिसुकिया
जिला-बलिया, उप्र
अंक - 104 (01 नवम्बर 2016)


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