विविध

दुआरे घुर लगवलीं

अंगना मों झारि-झुरि दुआरे घुर लगवलीं
कि जामि गइलँ ना, ऊजे अल्हर अमोलवा
कि जामि गइलँ ना,
 
अल्हर अमोलवा मों सींचहू ना पवलीं
कि आइ गइलँ ना, मोरे ससुरू उवदवा
कि आइ गइलँ ना
 
मचियाँ हि बइठेलँऽ बाबा बढ़इता
फेरा हो बाबा ना, मोरे ससुरू उवदवा
फेरा हो बाबा ना
 
कइसे क फेरीं बेटी तोरे ससुरू उवदवा
तुहार ससुर ना, माँगै अगहन गवनवाँ
तुहार ससुर ना
--------------------------------
अंक - 104 (01 नवम्बर 2016)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

मैना: भोजपुरी साहित्य क उड़ान (Maina Bhojpuri Magazine) Designed by Templateism.com Copyright © 2014

मैना: भोजपुरी लोकसाहित्य Copyright © 2014. Bim के थीम चित्र. Blogger द्वारा संचालित.