संपादकीय

चान बदरी में काँहे लुकाइल - राजीव उपाध्याय

चान बदरी में काँहे लुकाइल
कि चकती लगा के बउराइल।

जे सूरूज नाही जागे भिंसहरे
राति काँहे के बावे कोहनाइल।

किरिन जे फूटी त ओरइबे करी
कि संझवत के दियरी भूलाइल।

तकिया गोडतारी काँहे धइल कि
एतने में जियरा बावे अफनाइल।

बेरा कुबेरा ह जिनगी के चाभी
धइले रह काम ओकरे बा आइल।
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लेखक परिचय:-

नाम: राजीव उपाध्याय
पता: बाराबाँध, बलिया, उत्तर प्रदेश
लेखन: साहित्य (कविता व कहानी) एवं अर्थशास्त्र
संपर्कसूत्र: rajeevupadhyay@live.in
दूरभाष संख्या: 7503628659
ब्लाग: http://www.swayamshunya.in/
फेसबुक: https://www.facebook.com/rajeevpens

अंक - 106 (15 नवम्बर 2016)

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