संपादकीय

अँजोरिया में घेरले बा बदरी - रामपति रसिया

बीति गइल रतिया अन्हरिया, अँजोरिया में घेरले बा बदरी
घेरले बा बदरी, घेरले बा बदरी।
बीति गइल रतिया अन्हरिया, अँजोरिया में घेरले बा बदरी॥

आवे का पहिले बिचार सभे कऽइल
एके सुरतिया के मनवा में धऽइल
परल आगे लमहर बजरिया, अँजोरिया में घेरले बा बदरी
बीति गइल रतिया अन्हरिया, अँजोरिया में घेरले बा बदरी॥

सगरी सामान देखि मनवा धधाइल
कीनल जे जवन जेकरा मन में समाइल
छूटि गइल सुबरन गठरिया, अँजोरिया में घेरले बा बदरी
बीति गइल रतिया अन्हरिया, अँजोरिया में घेरले बा बदरी॥

रामपति रसिया का लउके ना अगवाँ
खाली बुझात नइखे कवनो बिभगवा
काँटा से भरल बा डगरिया, अँजोरिया में घेरले बा बदरी
बीति गइल रतिया अन्हरिया, अँजोरिया में घेरले बा बदरी॥
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रामपति रसिया






 
अंक - 106 (15 नवम्बर 2016)

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