संपादकीय

कुक्कुर के कहानी - 1 - धरीक्षण मिश्र

अध्याय - 1

कुक्कुर के हवे कहानी ई रउरा शायद पतिआइबि ना ।
बाकी हमहूँ कहि दे तानीa हम झूठ बात बतिआइबि ना ।।
त्रेता युग में एगो कुक्कुर चलि गइल राम दरबारे में ।
फरियाद सुना के न्याय उचित ले आइल अपना बारे में ।।
द्वापर में अर्जुन भीमो के ताकत जहवाँ पर खेलि गइल ।
तहवाँ पर साथ युधिष्ठिर का स्वर्गो में कुक्कुर हेलि गइल ।।
कलियुग में रूसी राकेट पर पहिला जतरा कुकुरे चढ़ल ।
रहि गइल लोग सब विज्ञानी ज्ञानी ध्यानी लीखल पढ़ल ।।
कुक्कुर अस ना गुर्जत रही कुक्कुर नीयर जे जागी ना ।
ओकर धन सम्पति दिन दुपहर के बा जे ले के भागी ना ।।
हमनीं में जे बोलतू बाटे अक्किल के दाँत लगवले बा ।
ओही का पीछे दुनियाँ बा ऊहे सबके भरमवले बा ।।
ई कुक्कुर गली-गली जाके सूघें हरदम कोने-कोने ।
गाड़ल झगरा के महक मिले तब ओ के गहिरे से खोनें ।।
सरकारो का डर लागेला ई कुक्कुर जो छुटहा रहिहें ।
आ कवरा हमसे ना पइहें तब हमरो के ई खनि खइहें ।।
तब कइसे एतवड़ राज चली ई चिन्ता दुखी बनावेले ।
तब हाथ सफाई के थोरे आपन सरकार देखावेले ।।
हर पाँच साल पर जादू के एक लमहर जाली बिछावेले ।
भारत भर के बोलतू कुक्कुर सब एके साथ बझावेले ।।
अइसनका जादू मारेले अइसन का मंत्र जगावेले ।
सब का माथा से बुद्धि और सद्भाव तुरंत भगावेले ।।
हमनी का खुद अपना अपना कुक्कुर के नावँ बताईले ।
सरकारी बैलेट बाकस में हम आपन कुकुर फँसाईले ।।
कुकुरो ओहि में फँसि जाये के अगुता जाले छरिया जाले ।
हमनीं के गोड़वा चाटि-2 निरघिन हो के लरिया जाले ।।
कुक्कुर कुक्कुर का आपुस में घनघोर लड़ाई ठनि जाला ।
हमनीं में कुछ चालाक लोग ओही दिनवाँ में बनि जाला ।।
नोचा नोची खिसिया खिसिया आपुस में ओकनीं का होला ।
दाँते तर अँगुरी दबा दबा देखेला गाँव नगर टोला ।।
हर एक कुक्कुर का साथी के दल मदत करे चलि आवेला ।
जेकरा में जेतना जइसन बल होला से सभे देखावेला ।।
कुक्कुर यद्यपि सबका दुवरा पर फेरी रोज लगावेला ।
पर ज्यादेतर जतिगो के बल आखिर में कामे आवेला ।।
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धरीक्षण मिश्र



 








अंक - 102 (18 अक्तूबर 2016)

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