विविध

गुमान करेलू - सुनील चौरसिया "सावन"

भूलि के दुनिया तू नभ में उङान भरेलू।
ए पंछी काहें एतना गुमान करेलू॥

केतनो ऊपरी उङबू आवे के परी नीचे
मोह-माया के डोरी तोहरा के खींचे।
छणिक सुख पे तू सीना उतान करेलू।
ए पंछी काहें एतना गुमान करेलू॥

बगइचा में लागि जाला जब मीठ फल
रस चूसि 'सावन' कुहुकेलू हर पल।
'हरि' के भूलि भ्रम के रसपान करेलू
ए पंछी काहें एतना गुमान करेलू॥

तोहरे देहियाँ में सगरी संसार बसेला
तोहर इतराइल देखि संसार हँसेला।
मोह में अनमोल जिनगी जियान करेलू
ए पंछी काहें एतना गुमान करेलू॥
-------------------------------------

लेखक परिचय:-

नाम: सुनील चौरसिया "सावन"
अमवा बाजार,रामकोला,कुशीनगर,उ.प्र.
मो: 9044974084,8423004695




अंक - 102 (18 अक्तूबर 2016)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

मैना: भोजपुरी साहित्य क उड़ान (Maina Bhojpuri Magazine) Designed by Templateism.com Copyright © 2014

मैना: भोजपुरी लोकसाहित्य Copyright © 2014. Bim के थीम चित्र. Blogger द्वारा संचालित.