संपादकीय

नून के पाग - रश्मि प्रियदर्शनी

झूठ के साच बतावत रहीं,
नून के पाग बनावत रहीं।
रऊआ त हईं नट के राजा,
अंगुरी प सबके नचावत रहीं
नून के पाग बनावत रहीं॥

हमरो से नेह, उनको से यारी
मुहवा प मीठ, पाछे कटारी
भाषण के धार बड़ा दुधारी
झूठ के राग बजावत रहीं
बतियन के अपना जादूगरी में
हसावत रही,रोवावत रही।
नून के पाग बनावत रहीं॥

वादा,भरोसा आ राउर दिलासा,
छन में आस , छन में निरासा,
'खटिया पे चर्चा' करावत रहीं'
सब मिले हैं जी' गीत गावत रहीं,
'अच्छा दिन' के जुमला सुनावत रहीं,
एही तरे सबके पोल्हावत रहीं।
नून के पाग बनावत रहीं॥
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लेखक परिचय:-

नाम: रश्मि प्रियदर्शनी
सदस्य - मैथिली भोजपुरी अकादमी,दिल्ली
पत्रकारिता/स्वतंत्र लेखन
सांस्कृतिक कूटनीति कऽ संस्था 'फ़ोरम फॉर कल्चरल डिप्लोमेसी' कऽ संचालन

अंक - 98 (20 सितम्बर 2016)



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