संपादकीय

ना समझ पाइला - पूजा गुप्ता

कबो..कबो हम अपना के ही 
ना समझ पाइला,

करे के चाहिला कुछ अउर 
कुछो अउरो क जाइला।


जे बात हमरा समझ ना आऐला 
जाने कइसे दुसरा के 
बड़ा नीमन से समझाइला,

लोगन के जौन गलती करे से रोकी ला 
उहे गलती हम अपने दोहराइला। 


सगरी दुनिया से जीत जाइला पर 
अपनन से 
जाने कइसे हार जाइला,

जब मुश्किल के 
बड़का बड़का चट्टान तुर ली ला 
त काहे 
एगो छोटकी सी बात से घबरा जाइला


कबों... कबों हम अपना के ही 
ना समझ पाइला॥ 

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लेखक परिचय:-


नाम: पूजा गुप्ता
गृहणी, कवयत्री, रेडियो जाकी, एंकर
नेपाल
मो: 0977-9807018946
फेसबुक: https://www.facebook.com/pujaguptacpr





अंक - 93 (16 अगस्त 2016)

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