संपादकीय

बरसत बदरिया - सुनील सिन्हा

बरसत बदरिया, भिजत चुनरीया,
सावन के ई मस्त फुहार I
गरजत बिजुरिया, बाजत पैजनिया,
अईले ना, ई बलमु हमार II

बह्सल उमरिया, मदमस्त जवनिया,
कईसे करी, ई साज़ श्रृंगार I
सुनी अटरिया, बिनुरे सावरिया,
जिअरा में, ई उतरल कटार II

लचकत कमरिया, डोलत डगरिया,
सावन के, ई राग मल्हार I
तडपत जियरवा, जईसे मछरिया,
काहे ना, ई संगे हमार II 

खनकत कलईया, बोलत सावरिया,
सावन में, ई काहे ग़ुबार I
धरकत हीयरवा, कहत सजनिया,
आई रऊआ, ई अंतिम गुहार II
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लेखक परिचय:-

नाम: सुनील सिन्हा
पेशा: सहायक संपादक (भोजपुरी पंचायत)
शिक्षा: एमबीए (एचआर) आईआईएम लखनऊ
पता: 237, अंजलि होम्स
शालिमार गार्डेन, एक्सटेन्शन - 1
सहिबाबाद,गाजियाबाद, उ प्र
ई-मेल: sunilsinha1970@gmail.com
मो: 8010346909
अंक - 93 (16 अगस्त 2016)

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