संपादकीय

आन्हर मनई - जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

जिनगी कऽ चाल 
आउर ओकर पड़ताल में 
बूझल दियरी
रिसे लागल दरद के लोर 
हियरा निकारे क।स बतकुचन 
नवटंकी लेखा लागल।

रोजे लोग 
कुल्हि खोरिन में 
अनासे अझुराइल देखालें 
बेबात के बात गढ़त 
कुछहू अकबकात 
बकलोल।

अपने घमंडे आन्हर 
उटपटांग कहत-सुनत
उलझत, न सुलझत 
कमजोरका के मेहरी लेखा 
भर गाँव के भौजाई बोलत 
देखाइल।
आपन नियत में ठुन्सले
सरल-पाकल 
विचारन के पोटरी 
ढीमिलात डोलत
भूखे छटपटात 
भल मनई कहाता।
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लेखक परिचय:-

बेवसाय: इंजीनियरिंग स्नातक कम्पुटर व्यापार मे सेवा
संपर्क सूत्र: 
सी-39 ,सेक्टर – 3 
चिरंजीव विहार, गाजियावाद (उ. प्र.) 
फोन : 9999614657
अंक - 94 (23 अगस्त 2016)

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