संपादकीय

भाव लगावे के परी - सरोज सिंह

घर घर बाढि गइल रोजगार,
लड़िका पढ़ि लिखि तइयार
भाव लगावे के परी॥

इंटर पढ़ी के लाख रूपइया,
बी ए के दस लाख!
अनपढ़ के केहू भाव ना पूछे,
फीरी बा भईल प्रचार!
भाव लगावे के परी॥

जइसे एक ठूँ घोड़ा पाले,
अउर करे बेयपार!
ओइसे लागे ला इहाँ,
लडिकन के बाज़ार!
भाव लगावे के परी॥
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लेखक परिचय:- 

नाम: सरोज सिंह जी
दिल्ली
मोबाइल: 9811483715

अंक - 92 (09 अगस्त 2016)

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