संपादकीय

ई बांस के बंसवार हऽ - राजीव उपाध्याय

ई बांस के बंसवार हऽ
जेवन सुखे-दुखे 
कामे आवेला।
ई बांस के बंसवार हऽ॥

मजल छवाला
माड़ो बन्हाला
झंडा मंदिर के लहराला।
ई बांस के बंसवार हऽ॥

फोंफी बनि लइका खेलावेला
बनि पुतला घोपड़ाड़ऽ भगावेला
चांचर बनि आँखि लगावेला।
ई बांस के बंसवार हऽ॥

ओहिसहीं जिनगी के तरकूल
ताड़ी नियर सरवेला-चूवेला
बेरा से दवाई, कुबेरा मुआवेला।
ई बांस के बंसवार हऽ॥

बांस के पूलई बनि मन
मांटा नियर धऽ लेला
कि बरिसन सरि के अंखुआला।
ई बांस के बंसवार हऽ॥
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लेखक परिचय:-

पता: बाराबाँध, बलिया, उत्तर प्रदेश 
लेखन: साहित्य (कविता व कहानी) एवं अर्थशास्त्र 
संपर्कसूत्र: rajeevupadhyay@live.in 
दूरभाष संख्या: 7503628659 
ब्लाग: http://www.swayamshunya.in/
अंक - 92 (09 अगस्त 2016)

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