संपादकीय

पिया-मिलन - डॉ भगवान सिंह 'भास्कर'

गोरी! जइबू ससुररिया कवन दिनवा?

बचपन में नइहर मे छुटि के खेललू
लाल-लाल ओठवा से अमरित चुववलू
कबहूँ ना सोचलू ससुरा के बतिया
कवन दिनवा
गोरी! जइबू ससुररिया कवन दिनवा?

जब आइल जवानी यौवन रस मातल
नागिन जस देह मिलल भइलू तू पागल
लोग बउराला देखि सुन्दर सुरतिया
कवन दिनवा
गोरी! जइबू ससुररिया कवन दिनवा?

अब नइहर के रीति-रिवाज तू छोड़ऽ
पिया से नेहिया के नाता तू जोड़ऽ
धेयान लगाव तू पिया के चरनिया
कवन दिनवा
गोरी! जइबू ससुररिया कवन दिनवा?

पिया अलबेला करेजा से लगइहें
आँखि के पपनी पर तोहके बइठइहें
खाल ऊँच से उ ना करिहें बेपानी
कवन दिनवा
गोरी! जइबू ससुररिया कवन दिनवा?

पिया के नगरिया सभे केहू जाला
जे ज इसन करे ओकरा ऊ भेंटाला
'भास्कर' करमे फल सरग नरक नगरिया
कवन दिनवा
गोरी! जइबू ससुररिया कवन दिनवा?
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लेखक परिचय:-

नाम: डॉ भगवान सिंह 'भास्कर'
प्रधान संपादक साहित्य प्रहरी अउरी उड़ान
पता: खादी भंडार के सामने गली, लखराँव
सीवान, बिहार - 841226
 
 
 
अंक - 90 (26 जुलाई 2016)

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