विविध

कि सगरी खरिहान्ह - राजीव उपाध्याय

देखि सखी का चाहीं तोहके
सूनर सूनर रुप तोहार
कि सगरी खरिहान्ह॥

नैन जे तोहर राह तिकवत बा
रहिया से ओ केहू लवते नाही
दूर केवनो देस जइहें
धइले-धइले तोहर कान्ह॥

अँखिया में जेवन नेह जरत बा
गेह मेह में बहि-बहि जाई
सूरता से सभ उतरी तोहरा
देखि के नवकी दुनिया के दोकान॥

भइया, सइयाँ अउरी लरिकाइयाँ
सभकर आपन बावे दोकान
कईलऽ जेतना हो सके सिंगार
बइठल-बइठल एही मटिया दलान॥
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लेखक परिचय:-

नाम: राजीव उपाध्याय
पता: बाराबाँध, बलिया, उत्तर प्रदेश
लेखन: साहित्य (कविता व कहानी) एवं अर्थशास्त्र
संपर्कसूत्र: rajeevupadhyay@live.in
दूरभाष संख्या: 7503628659
ब्लाग: http://www.swayamshunya.in/
फेसबुक: https://www.facebook.com/rajeevpens
अंक - 88 (12  जुलाई 2016)

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