संपादकीय

तब से बा अउँजियाइल - मनोज भावुक

जब से शहर में आइल तब से बा अउँजियाइल 
रोटी बदे दुलरुआ खूंटा से बा बन्हाइल 

गदहो के बाप बोले, दिनवो के रात बोले
सुग्गा बनल ई मनई पिंजड़ा में बा पोसाइल

शूगर बढ़ल रहत बा, बी.पी. बढ़ल रहत बा
ग़जबे के जॉब बाटे किडनी ले बा डेराइल

पेटवे से बा कनेक्शन एह जॉब के, एही से 
सहमल बा शेर अउरी गीदड़ बा फनफनाइल 

जे सुर में सुर मिलावल, जे मुंह में मुंह सटावल
ओही के बा तरक्की , ओह पर बहार आइल

मीटिंग के बदले मेटिंग, सर्विस के बदले सेटिंग
जेकरा में ई हुनर बा, ऊ हर जगह फुलाइल 

अंधेर राज में बा चमचन के पूछ भलहीं 
बेरा प यार हरदम टैलेंट कामे आइल 

अन्हियार के मिटावे, सूरज उहे कहाला 
ओही से बाटे दुनिया, ऊहे सदा पुजाइल

अइसे त फेसबुक पर बाड़न हजार साथी
संकट में जब खोजाइल, केहू नजर ना आइल

नेटे प देख लिहलस माई के काम- किरिया
बबुआ बा व्यस्त अतना लंदन से आ न पाइल

साथी के घात से बा गतरे गतर घवाहिल
रिश्तन के जालसाजी भावुक के ना बुझाइल 
----------------------------
अंक - 83 (7 जून 2016)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

मैना: भोजपुरी साहित्य क उड़ान (Maina Bhojpuri Magazine) Designed by Templateism.com Copyright © 2014

मैना: भोजपुरी लोकसाहित्य Copyright © 2014. Bim के थीम चित्र. Blogger द्वारा संचालित.