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छिप के चुपके से पी-पी आँसू - प्रभुनाथ सिंह

छिप के चुपके से पी-पी आँसू प्यास दिल के बुझावल करीले
केहू तड़पे ना हालत पर हमरा चोट खा-खा हँसावल करीले
केतना मस्ती बा जल-जल मरे में दर्द के मार पल-पल सहे में
केतना सुख बा विरह का घड़ी में उफ् ना कह के, तड़प के रहे में

प्यार में जिन्दगी के लुटा के गीत गा-गा रिझावल करीले
चाँद के चाँदनी अँगना तहरा पाप के दाग बा बखरा हमरा
प्यार-मंथन में अमरित तहरा बा विख पिये में ना ऊजुर बा हमरा
सह के जुलुमी जमाना के ताड़न तोहर तसबीर उतारल करीले
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प्रभुनाथ सिंह
अंक - 85 (21 जून 2016)

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