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आखर-आखर झूठ लगे अब - अक्षय कुमार पांडेय

सपना कs पुल टूट गइल बा
नाव कहीं ना लउके,
आस - पास अन्हियार बहुत बा
गाँव कहीं ना लउके,
चाल करे घरियाल नदी में
हर पत्थर पर काई केशव
कइसे लड़ीं लड़ाई केशव! 
कइसे लड़ीं लड़ाई...........। 

रोज वसूले मौसम करजा
जिनिगी भइल जुआरी,
मुअतो नइखे भूख उड़ासी
मुँह से निकसे गारी,
पीठ कहे तs झूठ समझिहs
पेट कहे सच्चाई केशव! 
कइसे लड़ीं लड़ाई केशव! 
कइसे लड़ीं लड़ाई...........। 

अब मन में मधुमास न उतरे
अब ना कोइल गावे,
रंग - महल में बइठ कल्पना
अब ना ओठ रंगावे,
आखर - आखर झूठ लगे अब
गीत गजल कबिताई केशव!
कइसे लड़ीं लड़ाई केशव! 
कइसे लड़ीं लड़ाई...........। 
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अंक - 83 (7 जून 2016)

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