संपादकीय

मृत्युंजय अश्रुज जी कऽ दू गो गीत

मत लs तूं जान हमार

सुनs सुनs माई बाबा करीले बिनीतिया
जनी लs तूं जान हमार
बेटा का बदले बेटी बनवले राम
का बाटे दोष हमार।

अबही त बानी हम मांस के लोदा
कइनी कवन क्षति तोहार
माई तs होली ममता के मूरत
गोदिया में स्वर्ग तोहार
बाबा का बाहीं झूला में होला
दुनिया के खुशी अपार।

माई के ममता देवमुनि गावे
आज कहां ममता तोहार
जिनगी के दान कर करsएहसनवा
छीनs मत सौभाग हमार।
आधा पेट खा कैसहूं तन ढाकेब
करेब हम सेवा तोहार।

तोहरे किरिया माई रहबो कुंआरी
दहेज से देबो उबार
माई बाबा के दुलार चीखा दs
धो धो पीअब चरण तोहार। 
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फूंकके चलsडगरिया

बबुनी चलs तूं मत बलखाके
गिरीहें चांद सूरज मुरछाके
करs जवानन पर रहम
मत लs बुढवन के धरम
ई खिलत जोबना देखलाके
बबुनी चलs.......

सुन्दरता के तूं दरिया बाडू 
यौवन से लहकत सरिया बाडू
ई उमर बडा नाजुक होला
संभल संभल के चले होला
शिकारी बैठल घात लगाके
बबुनी चलs......

झूठा प्रीत तोहसे लगाई
जाल में अपना ली फंसाई
रख दी जीवन नरक बनाके
बबुनी चलs तूं मत बलखाके
गिरीहे चांद सूरज मुरछाके ।
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मृत्युंजय अश्रुज

 








अंक - 84 (14 जून 2016)

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