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शहीदन के श्रद्धांजलि - प्रसिद्ध नारायण सिंह

लुटा दिहल परान जे, मिटा दिहल निसान जे।
चढ़ा के सीस देस के, बना दिहल महान जे ॥1॥

जने-जने जगा गइल, नया नसा पिला गइल।
जला-जला सरीर के, स्वदेस जगमगा गइल ॥2॥

पहाड़ तोडि़-तोडि़ के, नदी के धारि मोडि़ के।
सुघर डहरि बना गइल, जे काँट-कूँस कोडि़ के ॥3॥

कराल क्रान्ति ला गइल, ब्रिटेन के हिला गइल।
बिहँसि के देस के धजा गगन में जे खिला गइल ॥4॥

अमर समर में सो गइल, कलक-पंक धो गइल।
लहू के बूँद-बूँद में, विजय के बीज बो गइल ॥5॥

ऊ बीज मुस्करा उठल, पनपि के गहगहा उठल।
बिनास का विकास में, वसंत लहलहा उठल ॥6॥

कली-कली फुला गइलि, गली-गली सुहा गइलि।
सहीद का समाधि पर, स्वतंत्रता लुभा गइलि ॥7॥

चुनल सुमन सवारि के, सनेह-दीप बारि के।
चली, उतारे आरती, सहीद का मजारि के ॥8॥
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लेखक परिचय:-

नाम: प्रसिद्ध नारायण सिंह
जनम: जुलाई 1901
जनम थान: चित बड़ागाँव, बलिया, उत्तरप्रदेश
रचना: बलिया-बहार, बलिदानी बलिया, फुलडलिया
अंक - 86 (28 जून 2016)

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