संपादकीय

जान जाई त जाई - जनकवि भोला

जान जाई त जाई, ना छूटी कभी
बा लड़ाई ई लामा, ना टूटी कभी॥

रात-दिन ई करम हम त करबे करब
आई त आई, ना रुकी कभी॥

बा दरद राग-रागिन के, गइबे करब
दुख आई त आई, ना झूठी कभी॥

साथ साथी के हमरा ई जबसे मिलल
नेह के ई लहरिया, ना सूखी कभी॥
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अंक - 14 (10 फरवरी 2015)

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