संपादकीय

आजादी - विजय मिश्रा 'बाबा'

बड़ा हियरा में रहे अरमान अँजोरिया हो जाई।
कहियो आजादी हमरो गाँव के ओरिया आई॥

खेत खरिहान में तिरंगा फहरावे केहू त आई!
लाल किला के संदेशा हमनियो ख़ातिर पेठाई!!

बाकी अबहू सभे दिन एके लेख बा हो भाई!
ना जाने आजादी कब ले हमनि किहाँ आई!!

घुरफेंकन काका लड़ल रहन अँग्रेज से लड़ाई।
बाबूजी हामरो रहनी फौज के जांबाज़ सिपाही॥

आज़ाद बा सौंसे देश ई कवना मुँह से कहब ऐ भाई!
अखडेरे मुई जवान किसान ई कईसनआज़ादी ऐ भाई??
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अंक - 80 (17 मई 2016)

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