संपादकीय

चइत में हियरा - विजय मिश्रा 'बाबा'

भोजपुरी आपाना स्नेहिल हियरा में परंम्परा के सहेजला खतिरा जानल जाले। सभे रँग मौसम अउरी मौक़ा के हिय में सहेज हमनी के भाखा भोजपुरी बड़ी दुलरि हई। फगुआ के गीत गवनई रस रँग के स्नेह अमृत से सराबोर कईला के बाद, धरोहर में से चइती के परोसला के वर्णन शब्द से ना कइल जा सकेला। नसे नस में अईसन भीने ला कि करेजा के उडुहि गुडुहि ले लबलबा जाला। चइती हमारा समुझ में दुनिया के सबसे बड़हन समूह गान हउए। सैकड़ों लोग एक संघे चइती के गावेले। भोजपुरिये अईसन ऐकछ भाखा बिया जवन समूह गान के परंपरा में प्राण फूंकेले बिया। सबसे बड़ खासियत बा कि ना त ऐकरा में कवनो संगीत निर्देशक होले, अउरी न कवनो बतावे वाला, बाक़िर का मजाल की ढ़ोलक के थाप अउरी झाल के झझकार में एकहु ताल गलत पड़े। मने मन कुल्हि लोग अपन आपन भूमिका तय कई के भोजपुरी के श्रृंगार रस रँग अउरी संस्कार में बोरी बोरी के अँजोर कई देवेला। चइती में अलाप एगो विशेष कला ह, जवन लेहते पोरे पोर में पेहम हो जाला। अलाप अउरी टांसी मारे वाला के आवाज सभे से बेसी सुरीला अउरी अलगे होला। चइती गावे वाली मण्डली में टांसी मारे वाला जरूर होले। साँच कहल जाऊ त चइती चइत महीना में श्रृंगार ले के आवेला। विरह से शुरू होके श्रृंगार से सजावला के बाद भक्ति के गँगा में से पावन जल के छींटिका मारी मारी करेजा के भीतरी ले गमका के साराबोर कई देवेला। 
'देहिया में अगिया लगावे हो रामा, कोइली तोरी बोलिया।'
सुतल पिआ के जगावे हो रामा कोइली तोरी बोलिया।। विरह प्रित और प्राकृति के जईसन मनमोहक अउरी सजीव चित्र जईसन चइती में उकेरल जाला अउरी कतहूँ ना भेंटाई। भक्ति से सराबोर करे वाला चइती में राम जनम के बड़ी नीक बखान कईल गईल बाटे ..
आजु चइत हम गायब हो रामा राम के जनमवा। 
घरे घरे बाजे ला अनद बधैया हो रामा राम के जनमवा॥
राजा दशरथ लुटावे अन-धन सोनवा हो रामा राम के जनमवा।
केकयी लुटावे सोने के मुनरिया हो रामा राम के जनमवा॥
सिंगार रस में गोता लगावे ख़ातिर चइती के साज बाज लयकारी कान में अइसन रस घोरेला की अंगे-अंग बिजुली लेखा झंकार करे लागेला ... 
सेज चढ़त डर लागे हो रामा, बलमू के संगवा।
रुनुक झुनुक मोरी पायल बाजे, सास-ननद मोरी जागे हो रामा, बलमू के संगवा॥
चनवा पापिया सेजरिया पऽ करे ताका-झांकी।
उठेला दरद पोर-पोर हो रामा, बलमू के संगवा॥
तात्पर्य ई बाटे कि भोजपुरी के आगाध बखारी में से जवने उठा के देखबि, सोना चाँदी हीरा मोती भेंटाई। भोजपुरी खलिसा भाखा ना ह ई उ बेयार हउए जवना से सीतलता के छाँह में बड़ी आनंद के अनुभूति होला। चइत महीना में सउँसे भोजपुरिया स्नेही के औलाह बधाई ... 
-------------------------------------------

लेखक परिचय:-


नाम: विजय मिश्रा 'बाबा' 
स्वतंत्र लेखक,पटना, बिहार 





अंक - 76 (19 अप्रैल 2016)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

मैना: भोजपुरी साहित्य क उड़ान (Maina Bhojpuri Magazine) Designed by Templateism.com Copyright © 2014

मैना: भोजपुरी लोकसाहित्य Copyright © 2014. Bim के थीम चित्र. Blogger द्वारा संचालित.