संपादकीय

अभय त्रिपाठी जी कऽ तीन गो कबिता

जानवरन के मीटिंग 

जानवरन के मीटिंग में भइया बस इहे मुद्दा उभर के आईल बा, 
घर लुटईला के बाद हमनी के करम भी इंसानन में बटाईल बा। 
सबकर दुखड़ा सुन के राजा शेर के आँख में पानी भर आईल बा, 
कइल जाई जाँच होखी हक खातिर महासंग्राम के बिगुल बजाईल बा॥
जानवरन के मीटिंग में.................
 

सबका सहमति से एगो संविधान पर अंतिम मुहर लगाईल बा, 
सबसे पहिला हमार दुखड़ा के राग ढ़ेचुँ ढ़ेचुँ में गवाईल बा। 
बाल मजदूरी अऊर श्रमिक उत्पीड़न में हमार हक दबाईल बा, 
ई सुनते ही घोड़ा खच्चर ऊँट के राग भी एहि में समाईल बा
जानवरन के मीटिंग में.................

लोमड़ी मौसी के हाल तऽ अऊरो बदतर बा के ओरहना आईल बा, 
दुसरा के माल पर आपन पेट भरे कऽ हक नेतवन में बटाईल बा। 
नेताजी के चर्चा सुनते ही गिरगिटिया लोगन के रंग भी बदलाईल बा, 
उनकर रंग बदले कऽ एस्क्लुसिव अधिकार भी नेता लोग चुराईल बा
जानवरन के मीटिंग में.................

भाई से भाई लड़त देख कुकुरन के जात भी शरम से पनियाईल बा, 
पतनशील समाज में इंसान के दरिंन्दगी से जानवर भी शरमाईल बा। 
जहर उगीले के सर्प राज के महारथ पर भी पूरा पानी फेराईल बा, 
नारी के कमसिन जीवन में नारी के जरिये ही जहर घोलाईल बा
जानवरन के मीटिंग में.................

इहे हाल रही तऽ हमार का होखी के नारा से पूरा हाल थर्राईल बा, 
सबसे बुरा हाल के रोना त़ऽ भईया खुद राजा शेर से ही रोआईल बा। 
बड़ बड़ हथियार से लैस चूहा जइसन आदमी के रक्षक शेर कहाईल बा, 
राजा शेर के दुखड़ा सुन सब जानवरन के आँख में पानी भर आईल बा
जानवरन के मीटिंग में.................

त का करीं ?

चहलीं तऽ बहुत कि खुश रहीँ हम,
लेकिन दिल ही दगा दे गइल त का करीं ?
लगावे चलनी खूबसूरत बाग.
लेकिन माली ही उजाड़ दिहलसि तऽ हम का करीं ?
वक्त के आँधी बड़ा बेदर्दी बा,
जब नाखुदा ही डूबा दे तऽ हम का करीं ?
दिल तऽ आखिर दिल ही बा,
जब टूट ही गइल तऽ हम का करीं ? 

शिव जी क धमवा 

आइल बा हो आइल बा शिवजी क धमवा,
पल में बनावे ल ऊ सगरे जग के कमवा
धूनी रमावे ले , भंगिया चढ़ावे ले,
त्रिनेत्र खोली के ऊ सबके तरावे ले,
बढ़ी च ल बढ़ी च ल नहीं दे ख तनवा,
आइल बा हो आइल बा
महिमा अपार दि खी लागि जब ध्यनवा,
खुल जाई खुल जाई राउर फूटल ग्यानवा,
नाही आई काम कवनो शिवसागर में धनवा 
आइल बा हो आइल बा
राजा हो, रंक हो, या होव तू फकीरवा,
बाबा आगे धूल बाटे सगरे जखीरवा
जनम जनम खातिर तर जाई तनवा
आइल बा हो आइल बा
आइल बा हो आइल बा शिवजी क धमवा,
पल में बनावे ल ऊ सगरे जग के कमवा
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अंक - 68 (23 फरवरी 2016)

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