संपादकीय

जयशंकर प्रसाद द्विवेदी जी कऽ दूगो कबिता

जनि करिहा

बड़ी मेहनत से बनेला ई शान बाबू। 
जनि करिहा इजतिया जिआन बाबू॥ 

कतहू न मिलिहन अइसन देश आ समाज हो 
नहीं पईबा कतहू अइसन मनई खुसमिजाज हो 

इहवें होला संस्कारन के विहान बाबू। 
जनि करिहा इजतिया जिआन बाबू॥ 

ज्ञान अ विज्ञान के जवान इहे देश हो 
दुनिया मे सबसे महान इहे देश हो 

होला इहवें से विकसित अरमान बाबू। 
जनि करिहा इजतिया जिआन बाबू॥ 

हर धरम – करम फुले अ फले इहवाँ 
सनेहिया क गगरी मिलेला ढेर इहवाँ 

एही से बेसी न मिलिहें सम्मान बाबू।
जनि करिहा इजतिया जिआन बाबू॥ 

एही के सराहा खाली एकरे के सँवारा हो 
बाउर खियाल नाही केकरो के गंवारा हो 

करिहा देशवा नमन भूली अभिमान बाबू। 
जनि करिहा इजतिया जिआन बाबू॥ 

हमहु बोली बोलब

हमरा मालूम न नीमन, बाउर, 
भर दिन कलई खोलब। 
हमहु बोली बोलब॥ 

चीचरी परलका कागज लाइब। 
दुअरा बईठ के किरिया खाइब। 
मंच पर चढ़के दांत चियारब,
जीभर माइक तोड़ब। 
हमहु बोली बोलब॥ 

बिन गिनती हम पाला बदलब। 
हर दम साधब आपन मतलब। 
बुड्बकन के बांटब पाहुर, 
भर मन माहुर घोलब। 
हमहु बोली बोलब ॥ 

बिन बतकही के छेड़ब तान। 
भरब जेब हम सांझ विहान। 
भाषण अनसन आउर प्रदर्शन, 
भर दिन तखती ले डोलब। 
हमहु बोली बोलब॥ 

सोचब ना, दोष लगाइब। 
घोंट घांट के कसमों खाइब। 
पबलिक के बहकाइब निस दिन, 
खाली डलरे तोलब।
हमहु बोली बोलब॥

अजुए बोलाइब काल्ह भगाइब।
मंहइयों क सुतल भाग जगाइब। 
गुटका खाति परमिसन देइब, 
सभनी के जेब टटोलब।
हमहु बोली बोलब॥
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लेखक परिचय:-

नाम: जयशंकर प्रसाद द्विवेदी 
मैनेजिग एडिटर (वेव) भोजपुरी पंचायत
बेवसाय: इंजीनियरिंग स्नातक कम्पुटर व्यापार मे सेवा
संपर्क सूत्र: 
सी-39 ,सेक्टर – 3 
चिरंजीव विहार, गाजियावाद (उ. प्र.) 
फोन : 9999614657
अंक - 60 (29 दिसम्बर 2015)

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