संपादकीय

बदल गई बोलिया - राम जियावन दास 'बावला'

हाथ गोड़ उहै बा कपार देह उहै बाटै 
अचरज लागैला बदल गई बोलिया।

गाँव गली घर कुल जइसे के तइसे हो 
राम जाने कइसे बदल गई टोलिया। 

हवा पानी उहे बा परानी बदलाव मुँहे 
धीरे-धीरे होत बा उधार कुल पोलिया।

चान भान धरती अकास कुल उहै बाटै 
मढ़वा पुरनका बदल गई खोलिया।।
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लेखक परिचय:-

नाम: राम जियावन दास 'बावला'
जनम: 1 जून 1922, भीखमपुर, चकिया
चँदौली, उत्तर प्रदेश
मरन: 1 मई 2012
रचना: गीतलोक, भोजपुरी रामायण (अप्रकासित)
अंक - 56 (1 दिसम्बर 2015)

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