संपादकीय

हेरा गइले बदरी में चनवां

हेरा गइले बदरी में चनवां रे गुइयां चैत महीनवां।

पागल पवनवां सुमनवा बटोरे,
नरमी चमेलियन के बंहियां मरोड़े
पांख झारि नाचेला मोरवा रे गुइयां चैत महीनवां।

कोइली के बोली मोरा जियरा जरावे,
घर-आंगन मोहे तनिको ना भावे
देवरा पापी निरखे जोबनवां रे गुइयां, चैत महीनवां।

अंक - 47 (29 सितम्बर 2015)

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