संपादकीय

सजनी पछतइबू - डा. डी.टी. राव "बेकाम"

सजनी पछतईबू, जहिया सजन घरे जइबू।

का कहियें तू अइलू जग मे भूलि गईल ऊ बतिया।
ना रखलू कोरवर चुनरिया मारि गइल तोर मतिया।।
कवनो जतन केतनो तू करबू ना उनके भरमइबू।
सजनी पछतइबू जहिया सजन घर जइबू।।

कौडी-कौडी धन के बिटोरलू, किनलू हीरा हजार।
अन्त समईया बनि बेअपारी बेचलू कवने बजार।।
नेकी बदी के लेखा जोखा सगरो ऊंहां दइबू
सजनी पछतइबू जहिया सजन घर जइबू।।

चारि कहंरवा उठइहें डोलिया पोछत अंसुआ चलिहें।
पीछे पीछे चलिहें बराती राम नाम सत् कहिहें।।
डोली उतरी नदिया कगरी सुति के नाच नचइबू
सजनी पछतइबू जहिया सजन घर जइबू।।


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लेखक परिचय:-

नाम - डा. डी.टी. राव "बेकाम"

संवाददाता, 
दैनिक जागरण
संपर्क –
ग्राम-सिधावें इन्दरपुर
पोस्ट-टेकुआटार,
जिला-कुशीनगर, उ.प्र.
अंक - 42 (25 अगस्त 2015)

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