संपादकीय

मन तू काहे ना करे रजपूती - परमहंस शिवनारायण स्वामी

मन तू काहे ना करे रजपूती।
असहीं काल घेरि मारत ह
जस पिजरा के तूती।

पाँच पचीस तीनों दल ठाड़े
इन संग सैन बहुती।

रंगमहल पर अनहद बाजे
काहें गइलऽ तू सूती।

शिवनारायन चढ़ मैदाने
मोह भरम गइल छूटी।
------------------------------------------------ 

लेखक परिचय:-

                                                   नाम: परमहंस शिवनारायण स्वामी 
जनम - 1750
जनम स्थान - चन्द्रवार, बलिया, उत्तर प्रदेश

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

मैना: भोजपुरी साहित्य क उड़ान (Maina Bhojpuri Magazine) Designed by Templateism.com Copyright © 2014

मैना: भोजपुरी लोकसाहित्य Copyright © 2014. Bim के थीम चित्र. Blogger द्वारा संचालित.