संपादकीय

सम्पादकीय: अंक - 38 (28 जुलाई 2015)

जाहीं खाती आइल बा सभ

हर चीझ कऽ एक ना एक दिन अंत होखबे करेला; चाहें ऊ केवनो सामान होखे भा जिनगी। सामान ओरा जाला तऽ ऊ बाजारी से खरीद के आ जाला बाकिर जिनगी ओरा जाले तऽ बस ओरा जाले। एकर केवनो बाजार नइखे जाहाँ से खरीदल जा सके। बस एके बेर बेसहाले। एही सामान के खतम भइला के केवनो दुख केहू के ना होला बाकिर जिनगी के खतम भ इला के दुख सभका होला। अन्जानो अदिमी के अफसोस होखेला।
27 तारीख क सांझ ए देस कऽ सबसे बेसी मान पावे वाला अदिमी औरी पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम साहब आखिरी साँझ बन गउवे अउरी सगरी देस के आँखि से लोर गिरे लगुए। सायदे केहू अइसन होई जेकर मन भारी ना भइल होइ। जाहाँ ले हम जानत बानी दुनिया कऽ लिखित इतिहास में सायदे केहू अइसन अदिमी होई जे एतना बड़हन जिनगी अउरी ऊँचाई पऽ पहुँचियो के बिना केवनो बवाल के देहिं छोड़ देले होखे। सायद एही के चमतकार कहल जाला। उहाँ के जिनगी ना खाली सफलता कऽ काथा हऽ बाकी एगो आदरसो खड़ा कइले बे जेवन ए देस के बेरा-कुबेरा हिम्मत बढाई।
बीतल हपता में भोजपुरी कऽ जानल-मानल सहित्याकार सत्यनारायण मिश्र 'सत्तन' जी भोजपुरी कऽ सेवा करते आपन देंह छोड़ि देहनी हँ। राउर जोगदान भोजापुरी इयाद राखी।

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