संपादकीय

दहेजवा से बड़का कवनो पाप न ह भाई

का हो चाचा का हो भइया
का हो दीदी का हो मइया
कहिया समझ में आई
दहेजवा से बड़का कवनो
पाप न ह भाई।

कब ले रॉब जातवे खातिर
समाज आपण लजाई
गलती केहु और बाटे ,
सजा केहु दोसर काहे पायी
दहेजवा से बड़का कवनो
पाप न ह भाई।


नवरात्र में पूजा करके कन्या जे खियावेला
जनम से पहले वोहवके काहे मर गिरावेला
बिना गलती के नारी कबले मार खायी
दहेजवा से बड़का कवनो
पाप न ह भाई।

कब बदली परिदृश्य भइया
दहेज़ कब वोराई
कब शक्ति के जनम पर
ख़ुशी मनावल जाइ
कब उ ससुराल में भइया
अपना मइके के आनंद पायी
दहेजवा से बड़का कवनो
पाप न ह भाई। 

अपने से शुरुआत कर
लोगन के समझाव
हित मिट साथी संघाती
सबके मनाव
जे करे विरोध ओके समाज से भगाव
सब केहु जहिया मिली
ई दानव मराई
दहेजवा से बड़का कवनो
पाप न ह भाई।

-----------------जलज कुमार अनुपम
अंक - 21 (31 मार्च 2015)

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