संपादकीय

आदित्य दूबे जी के दूगो गीत

रउआँ सभ खाती आदित्य दूबे जी के दूगो गीत परस्तुत करत बाड़ी। पहिलीकी कबिता "नवका जमाना" कम्प्यूटर के परतीक बना के समाज पर तकनीक औरी मसीन के पड़त असर  के देखावे के परियास करत बे। आदित्य जी अपनी कबिता में आदमी के सुभाव में आइल बदलाव औरी ढलाव दूनो के बारे में कहे के परियास करत बाड़े। कइसे आदमी मसीन के परियोग से घुमा-फिरा के आपन नोकसान कर रहल बा। दूसरकी कबिता "बचपनवा" से आपन बीतल वकत के इयाद करत बाड़न।
-----------------------------------------------------------------------

नवका जमाना 

सादर परनाम ए बिग्यान के चमतकार
दुनिया घेराइल कम्प्यूटर इन्टरनेट में।

आ सगरो बिकास भाई- चारा के हरास भइल
प्रेम सदभाव गइल परसो के डेट में।
दुनिया घेराइल कम्प्यूटर इन्टरनेट में॥
 

काम क्रोध बढ़ गइल, दया छेमा घट गइल
भाई मारे लात अपने भयवे के पेट में।
दुनिया घेराइल कम्प्यूटर इन्टरनेट में॥
दुर्गा सीता लछमी सुरसती के पुजे लोग,
केतने दुर्गा लछमी देके दहेजवे के भेंट में।
दुनिया घेराइल कम्प्यूटर इन्टरनेट में॥

                   *****

बचपनवा 

माई के पीरितिया जगावेला
बचपनवा इयाद बड़ा आवेला।

बाबूजी बइठावे हमके कान्हे प
तितली उड़ावे जाईं बान्हें प
नून तेल रोटी बड़ा भावेला।
बचपनवा इयाद बड़ा आवेला॥

पढी लिखीं पटरी इसलेट प
सांझी के नहाए जाईं पूले प
खेतवा बगइचवा बोलावेला।
बचपनवा इयाद बड़ा आवेला॥

दुई चार रहले संघाती
रोज जाईं खेले ओल्हा पाती
भूतहा इनार डेरवावेला।
बचपनवा इयाद बड़ा आवेला॥

1 टिप्पणी:

  1. बड़ा हियरा से लिखले बानी सांवांग , अशहिं झझकरले रहीं ...

    उत्तर देंहटाएं

मैना: भोजपुरी साहित्य क उड़ान (Maina Bhojpuri Magazine) Designed by Templateism.com Copyright © 2014

मैना: भोजपुरी लोकसाहित्य Copyright © 2014. Bim के थीम चित्र. Blogger द्वारा संचालित.